ज्येष्ठ की तपती दुपहरी और ‘अधिक मास’ की आध्यात्मिक शीतलता—जून 2026 का महीना भारतीय पंचांग के इतिहास में एक दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। लाला रामस्वरूप कैलेंडर (Lala Ramswaroop Calendar) के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ का महीना केवल 30 दिनों का नहीं, बल्कि ‘अधिक मास’ के कारण लगभग 60 दिनों का होने जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव जून महीने के त्यौहारों, व्रतों और शुभ मुहूर्तों पर पड़ेगा।
यदि आप जून 2026 के त्यौहारों की लिस्ट, अधिक मास के नियम और साल की सबसे कठिन एकादशी—निर्जला एकादशी—की सही तारीख खोज रहे हैं, तो यह विस्तृत आर्टिकल आपकी सभी शंकाओं को दूर करेगा। लाला रामस्वरूप पंचांग की शुद्धता और दशकों पुराने भरोसे के साथ, आइए जानते हैं जून 2026 के हर महत्वपूर्ण दिन का विवरण।
जून 2026: एक विशेष और दुर्लभ महीना
जून 2026 की शुरुआत अधिक ज्येष्ठ मास (Purushottam Maas) के कृष्ण पक्ष से हो रही है। पंचांग के अनुसार, जब एक चंद्रमास के भीतर सूर्य की संक्रांति नहीं होती, तो वह ‘अधिक मास’ कहलाता है। इसे ‘मल मास’ भी कहते हैं क्योंकि इसमें कोई बड़ा शुभ कार्य (विवाह, मुंडन आदि) नहीं किया जाता, लेकिन भक्ति और दान के लिए इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ यानी सर्वश्रेष्ठ महीना माना गया है। लाला रामस्वरूप पंचांग 2026 के अनुसार, जून के पहले 15 दिन इसी दिव्य ऊर्जा से भरे रहेंगे।
प्रमुख त्यौहारों और इवेंट्स की विस्तृत जानकारी
15 जून 2026 (सोमवार) तक: अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की महिमा
जून के पहले पखवाड़े में आप अधिक मास की फलश्रुति का लाभ उठा सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में किए गए जप, तप और दान का फल सामान्य महीनों की तुलना में 100 गुना अधिक मिलता है।
क्या करें: भगवान कृष्ण (पुरुषोत्तम) की आराधना करें, भागवत कथा का श्रवण करें और दीप दान (Deep Daan) करें।
क्या न करें: इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार का आरंभ और मुंडन जैसे ‘काम्य’ संस्कार वर्जित हैं। 15 जून को अधिक ज्येष्ठ की अमावस्या के साथ यह पावन महीना समाप्त होगा।
16 जून 2026 (मंगलवार): ‘निज’ ज्येष्ठ मास का आरंभ
अधिक मास की समाप्ति के बाद 16 जून से ‘निज’ यानी सामान्य ज्येष्ठ मास वापस शुरू होगा। इसी दिन से रुकी हुई मांगलिक गतिविधियां और सामान्य व्रत अपनी गति पकड़ेंगे। सूर्य देव भी अपनी राशि बदलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे ‘मिथुन संक्रांति’ कहा जाता है।
25 जून 2026 (गुरुवार): निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) – तप की पराकाष्ठा
जून महीने का सबसे मुख्य और कठिन व्रत 25 जून को मनाया जाएगा। इसे ‘भीमसेनी एकादशी’ भी कहते हैं।
महत्व: साल की सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी सबसे श्रेष्ठ मानी गई है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस व्रत में सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती। भीषण गर्मी के बीच बिना पानी के रहना शरीर और मन के संयम की सबसे बड़ी परीक्षा है।
भीम की कथा: पाँच पाण्डवों में भीमसेन अपनी भूख को नियंत्रित नहीं कर पाते थे। तब महर्षि व्यास ने उन्हें सलाह दी थी कि यदि वह वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य चाहते हैं, तो उन्हें केवल ज्येष्ठ मास की इस निर्जला एकादशी का व्रत करना चाहिए।
दान का फल: इस दिन शीतल जल, शरबत, पंखे, छाते और मिट्टी के घड़े (सुराही) का दान करना महापुण्यदायक माना गया है। लाला रामस्वरूप कैलेंडर के अनुसार, इस दिन दान करने से पितरों की भी तृप्ति होती है।
27 जून 2026 (शनिवार): प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat)
जून का अंतिम प्रदोष व्रत 27 तारीख को पड़ेगा। शनिवार होने के कारण इसे शनि प्रदोष कहा जाएगा। शनि देव को प्रसन्न करने और संतान सुख की प्राप्ति के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी है।
जून 2026 की महत्वपूर्ण व्रत और तिथि तालिका
अपनी दैनिक योजना के लिए इन मुख्य तिथियों को नोट करें:
- 1 जून 2026: अधिक ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा (पुरुषोत्तम मास जारी)।
- 12 जून 2026: अधिक मास का प्रदोष व्रत।
- 15 जून 2026: अधिक मास की अमावस्या (समाप्ति)।
- 16 जून 2026: निज ज्येष्ठ मास का प्रारंभ, मिथुन संक्रांति।
- 21 जून 2026: वर्ष का सबसे बड़ा दिन (Summer Solstice)।
- 25 जून 2026: निर्जला एकादशी महापर्व (भीमसेनी एकादशी)।
- 27 जून 2026: शनि प्रदोष व्रत।
- 28 जून 2026: ज्येष्ठ शिवरात्रि व्रत।
शुभ मुहूर्त और विवाह तिथियां (Shubh Muhurat June 2026)
जून के महीने में शुभ मुहूर्तों को लेकर थोड़ा भ्रम हो सकता है।
मल मास की पाबंदी: 1 जून से 15 जून तक अधिक मास होने के कारण कोई भी विवाह या गृह प्रवेश का मुहूर्त नहीं है। इसे शास्त्रों में ‘शून्य मास’ माना गया है।
मुहूर्त की वापसी: 15 जून की रात के बाद से शुभ मुहूर्त फिर से खुलेंगे। 16 जून से लेकर 30 जून के बीच आप नए कार्यों की योजना बना सकते हैं। 25 जून (निर्जला एकादशी) का दिन भी दान और संकल्प के लिए बहुत शुभ है। विस्तृत जानकारी के लिए लाला रामस्वरूप पंचांग जून 2026 के पन्नों को देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लाला रामस्वरूप कैलेंडर के अनुसार जून 2026 में अधिक मास कब तक है?
वर्ष 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास 15 जून (सोमवार) को समाप्त हो जाएगा।
निर्जला एकादशी की सही तारीख क्या है?
निर्जला एकादशी 25 जून 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी।
क्या जून के पहले हफ्ते में शादियां हो सकती हैं?
नहीं, 15 जून तक ‘अधिक मास’ (मल मास) होने के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित हैं।
पुरुषोत्तम मास में कौन से देवता की पूजा की जाती है?
पुरुषोत्तम मास भगवान श्री कृष्ण (विष्णु जी) को समर्पित है। इस महीने में ‘मदन गोपाल’ या ‘बाल गोपाल’ की सेवा विशेष फलदायी होती है।
क्या निर्जला एकादशी पर पानी पी सकते हैं?
शास्त्रीय नियमों के अनुसार, निर्जला एकादशी पर आचमन के अलावा जल वर्जित है। हालांकि, बीमार या वृद्ध व्यक्ति अपनी क्षमतानुसार निर्णय ले सकते हैं।
जून 2026 में प्रदोष व्रत कब-कब हैं?
जून में दो प्रदोष व्रत हैं: 12 जून (अधिक मास वाला) और 27 जून (शनि प्रदोष)।
मिथुन संक्रांति 2026 में कब है?
16 जून 2026 को सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मिथुन संक्रांति कहा जाता है।
जेठ के महीने में निर्जला एकादशी का इतना महत्व क्यों है?
क्योंकि ज्येष्ठ मास में सबसे अधिक गर्मी होती है, इसलिए बिना पानी के व्रत रखना इंद्रियों पर विजय पाने और संकल्प शक्ति बढ़ाने का सबसे बड़ा साधन है।
अधिक मास में दान देने के लिए ‘मालपुए’ का क्या महत्व है?
अधिक मास (मल मास) में 33 की संख्या में मालपुए या वस्तुओं का दान करना बहुत प्राचीन और शुभ परंपरा मानी जाती है।
जून 2026 में कितने सरकारी अवकाश हैं?
जून में कोई बड़ा राष्ट्रीय पर्व नहीं है, लेकिन रविवार के अवकाश 7, 14, 21, और 28 जून को रहेंगे।
निष्कर्ष (Conclusion)
लाला रामस्वरूप पंचांग जून 2026 हमें यह सिखाता है कि समय कभी खराब नहीं होता, बस उसका उपयोग बदल जाता है। अधिक मास जहां हमें आत्म-चिंतन और भक्ति की ओर ले जाता है, वहीं निर्जला एकादशी हमें त्याग की शक्ति सिखाती है।
9 दशकों से भारतीय घरों का मार्गदर्शक रहा लाला रामस्वरूप कैलेंडर शुद्ध पंचांग का प्रतीक है। इस आर्टिकल को अपने परिजनों और WhatsApp ग्रुप पर अवश्य शेयर करें ताकि वे भी अधिक मास और निर्जला एकादशी की सही जानकारी पा सकें। सटीक पंचांग और भविष्यफल के लिए lalaramswaroopcalendar.com से जुड़े रहें!